हालाकि हम इस वक़्त किराये के मकान में रह रहे थे और हमारे पास बहुत कम पैसा था | लेकिन हमने कई ऐसी पत्रिकाओ की सहायता ली ,जिनमे देश में बिकाऊ सुन्दर घरों का वर्णन किया जाता था | हम वेटर होम्स एंड गार्डन्स और आर्किटेक्चरल डाईजेस्ट पड़ने लगे | वीकएंड्स पर हम सुन्दर मंहगे घरों के कमरे में चलते थे और उस माहोल में जीने की कल्पना करते थे |
यह प्रकिया अंतत काम करेगी |इस आस्था के साथ हमने एक स्क्रेप बुक बनाई जिसमे सुन्दर मकानों की तस्वीरे और वर्णन था| समय के साथ हमने बयालिस चीजो की सूची बनायी जो हम अपने आदर्श मकान में चाहते थे |
इस दौरान मैं अपनी नौकरी करता रहा ,अपना बिजनेस बढाता रहा | हमारी आमदनी बढती रही और हमारी बचत भी | इस प्रकिया को शुरु करने के एक साल की भीतर हम किराये के मकान को छोडकर एक सुन्दर मकान में रहने चले गये |जिसे हमने एक सुन्दर इलाके में ख़रीदा था | यह कई माईनों में अच्छा था लेकिन हम अपने दिल में जानते थे की यह हमारे “सपनों का घर ” नहीं था |
डेढ़ साल बाद हमने एक बार फिर इलाका बदला और एक महीने तक शहर भर के दर्जनों बिकाऊ मकान देखने के बाद हम एक ऐसे घर में गये जो दो दिन पहले ही बिकने में आया था | उसे एक नज़र देखने भर से ही हम तत्काल जान गये की हमे अपने सपनों का घर मिल गया है | हमने बिना बोले एक दूसरे की तरफ देखा और मकान को अच्छी तरह देखा |हम दोनों की राय एक ही थी |
दो महीने की सौदेबाज़ी के बाद उसकी कीमत तय हुई | इसके बाद पाच महीने फाईनेन्सिंग की व्यवस्था करने में लग गये | लेकिन सही समय पर हम अपने सपनों के घर के मालिक बन गये और तब से वही रह रहे है | बाद में पता चला की हमने अपने आदर्श घर के लिए बयालिस बिन्दुओं की जो सूची बनायी थी ,इस मकान में उसमे से इकतालिस बिन्दु थे |
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