Thursday, 21 August 2014

धेर्य अनिवार्य है


विवाह के बाद हमारे पास बहुत कम पैसा था और जब मैंने अपना बिज़नेस शुरु किया तो वह थोडा पैसा भी जल्द ही खत्म हो गया |बहरहाल सभी दम्पत्तियो की तरह हम भी इस बारे में बाते करते रहते थे की किसी दिन हमारे पास “सपनों का घर " होगा | हम पूरे परिवार के लिए आदर्श मकान में जीने के सपने देखते थे| अन्तत: हमने फैसला किया की हम अपने सपनों के घर को हासिल करने के लिए मानसिक तस्वीर की शक्तियों का इस्तेमाल करेगे |

 हालाकि हम इस वक़्त किराये के मकान में रह रहे थे और हमारे पास बहुत कम पैसा था | लेकिन हमने कई ऐसी पत्रिकाओ की सहायता ली ,जिनमे देश में बिकाऊ सुन्दर घरों का वर्णन किया जाता था | हम वेटर होम्स एंड गार्डन्स और आर्किटेक्चरल डाईजेस्ट पड़ने लगे | वीकएंड्स पर हम सुन्दर मंहगे घरों के कमरे में चलते थे और उस माहोल में जीने की कल्पना करते थे |

 यह प्रकिया अंतत काम करेगी |इस आस्था के साथ हमने एक स्क्रेप बुक बनाई जिसमे सुन्दर मकानों की तस्वीरे और वर्णन था| समय के साथ हमने बयालिस चीजो की सूची बनायी जो हम अपने आदर्श मकान में चाहते थे |

 इस दौरान मैं अपनी नौकरी करता रहा ,अपना बिजनेस बढाता रहा | हमारी आमदनी बढती रही और हमारी बचत भी | इस प्रकिया को शुरु करने के एक साल की भीतर हम किराये के मकान को छोडकर एक सुन्दर मकान में रहने चले गये |जिसे हमने एक सुन्दर इलाके में ख़रीदा था | यह कई माईनों में अच्छा था लेकिन हम अपने दिल में जानते थे की यह हमारे “सपनों का घर ” नहीं था |

 डेढ़ साल बाद हमने एक बार फिर इलाका बदला और एक महीने तक शहर भर के दर्जनों बिकाऊ मकान देखने के बाद हम एक ऐसे घर में गये जो दो दिन पहले ही बिकने में आया था | उसे एक नज़र देखने भर से ही हम तत्काल जान गये की हमे अपने सपनों का घर मिल गया है | हमने बिना बोले एक दूसरे की तरफ देखा और मकान को अच्छी तरह देखा |हम दोनों की राय एक ही थी |

 दो महीने की सौदेबाज़ी के बाद उसकी कीमत तय हुई | इसके बाद पाच महीने फाईनेन्सिंग की व्यवस्था करने में लग गये | लेकिन सही समय पर हम अपने सपनों के घर के मालिक बन गये और तब से वही रह रहे है | बाद में पता चला की हमने अपने आदर्श घर के लिए बयालिस बिन्दुओं की जो सूची बनायी थी ,इस मकान में उसमे से इकतालिस बिन्दु थे |

Wednesday, 6 August 2014

जरा विचार कीजिए.

दीपक तो अँधेरे मैं ही जला करते है
फूल तो काँटों मैं भी खीला करते है
थक कर न बेठ ए मंजिल के मुसाफ़िर
हीरे अक्सर कोयले की खान मैं ही मिला करते है.


जिनको आपने काम पर भरोसा होता है
वो नौकरी करते है
और जिन्हें आपने आप पर भरोसा होता है
वो व्यापार करते है


दो अक्षर का होता है लक
ढाई अक्षर का होता है भाग्य
तीन अक्षर का होता है नसीब
पर ये सब चार अक्षर की मेहनत से छोटे होते है

 

Tuesday, 5 August 2014

गीता ज्ञान

इंसान एक दुकान है और जुबान एक ताला
जब जुबान खुलती है तभी  पता चलता है
की दुकान सोने की है या कोयले की ...
                                                   जय श्री कृष्णा ..

Monday, 4 August 2014

कृष्णा परीक्षा



जो करे मुज़ से आस
कर दू उसका सत्यानास
उसके बाद भी जो करे मुज़ से आस
बन जाऊ दासो का दास
                 जय श्री कृष्णा

Friday, 1 August 2014

Duniya Se Bazi Jeet Kar Mashoor Ho Gaye
Itna Muskuraye Ke Dukh Sab Door Ho Gaye
Hum Kaanch Ke They, Duniya Ne Humko Fenk Diya
Shyam Ke Charno Mein Jab Aaye Toh Kohinoor Ho Gaye.